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हिंदी के लिए प्रयुक्त देवनागरी लिपि में कुल 52 वर्ण हैं, जिनमें 11 मूल स्वर वर्ण (जिनमें से 'ऋ' का उच्चारण अब स्वर जैसा नहीं होता), 33 मूल व्यंजन, 2 उत्क्षिप्त व्यंजन, 2 अयोगवाह और 4 संयुक्ताक्षर व्यंजन हैं।

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February 11, 2021

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अधिकतर भारतीय लिपियाँ ब्राह्मी लिपि से विकसित हुई हैं। देवनागरी लिपि का विकास भी ब्राह्मी लिपि से हुआ है। नागरी भारत की लगभग 10 प्रमुख लिपियों में से एक है। देवनागरी एक आक्षरिक (सिलैबिक) लिपि है जो प्रचलित लिपियों (रोमन, अरबी, चीनी आदि) में सबसे अधिक वैज्ञानिक है। अधिकतर लिपियों की तरह देवनागरी भी बाएँ से दाएँ की तरफ़ लिखी जाती है। प्रत्येक शब्द के ऊपर एक रेखा खिंची होती है (कुछ वर्णों के ऊपर रेखा कटी होती है, जैसे:- ध, भ) जिसे 'शिरोरेखा' कहते हैं। हिंदी के लिए प्रयुक्त देवनागरी लिपि में कुल 52 वर्ण हैं, जिनमें 11 मूल स्वर वर्ण (जिनमें से 'ऋ' का उच्चारण अब स्वर जैसा नहीं होता), 33 मूल व्यंजन, 2 उत्क्षिप्त व्यंजन, 2 अयोगवाह और 4 संयुक्ताक्षर व्यंजन हैं।
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Madhu Singh
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